Archive for the ‘सेवा से मुक्ति’ Category

यहां अकेला कोई नहीं होता
जून 12, 2007

ऊँ शांतिः शांतिः शांतिः 

मेरे लिखे को कुछ लोग पढ़ते हैं और उसमें से कुछ लोग ऐसे हैं जो अपनी मंशा से मुझे अवगत भी कराते हैं. इंटरनेट की दुनिया में भाषाई अल्पसंख्यकों का यह बर्ताव प्रेरक है. मैं खुद भी नियमित कुछ चिट्ठीयों को पढ़ता हूं और कुछ पर अपनी मंशा से उन्हें अवगत कराता हूं. अभी जो कुछ लिखा जा रहा है वह संतोषजनक नहीं है. इसके दो कारण हो सकते हैं. पहला तो अभी सबकुछ शुरूआती दौर में है और दूसरा संभवतः थोड़े लोग ही बचे हैं जो तकनीकि और परंपरा दोनों में पारंगत है. जो तकनीकि में कुशल हैं वे परंपरा से दूर हैं और जो परंपरा को जीते हैं वे तकनीकि से आक्रांत हैं. आपलोग इस समुद्र में सेतु का काम कर सकते हैं. परंपरागत ज्ञान और भारतीय समझ को पीने की कोशिश करिए उसके बाद आपके हाथ से जो कुछ लिखा जाएगा उससे पूरी मानवता का कल्याण होगा. यह आपका काम है, जिम्मेदारी है क्योंकि आप लोग तकनीकि में निपुण लोग हैं.

ऐसा करनेवाले आप अकेले नहीं होंगे. हर काल में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो जरूरत से ज्यादा मेहनत करते हैं. आपको किसने कहा कि आप हिन्दी में ही अपना सब काम करें. आप अंग्रेजी में यह काम आसानी से कर सकते हैं. पलायनवादी लोग ऐसा करते भी हैं. लेकिन कुछ लोग जूनूनी होते हैं. उनको पता नहीं होता कि इसकी प्रेरणा वे कहां से पा रहे हैं लेकिन ऐसे लोग होते हैं धुन के पक्के. किसी भी समाज, भाषा, जाति, धर्म के लिए ऐसे लोग अनमोल हीरे की तरह होते हैं. उनका नाम शायद इतिहास याद नहीं रखता लेकिन उनका काम सिर चढ़कर बोलता है.

कंप्यूटर पर आज इतना काम हिन्दी में शुरू हो चुका है कि आनेवाली पीढ़ी को उन संघर्षों से सामना नहीं करना पड़ेगा जो आज काम करके चले जाएंगे. यह देखकर सुख और संतोष होता है कि कुछ लोग भाषा के सवाल पर इतने धुन के पक्के हैं कि  अपने सुख और प्रगति की संभावना को नकार कर भाषा और उनकी सेवा में लगे हैं जो सिर्फ इसलिए तकनीकि से भयभीत रहते हैं क्योंकि यह तकनीकि उनकी भाषा में नहीं होती. मैं व्यक्तिगत रूप से इन सबको बार-बार नमन करता हूं.

एक बात मैं जरूर कहूंगा. जब आप यह काम कर रहे हैं तो केवल आप ही काम नहीं कर रहे हैं. वे लाखों करोड़ों लोग आपके साथ हैं जो आगे चलकर इस पगडंडी को एक्सप्रेस-वे में बदल देंगे. आपके ऊपर जिम्मेदारी बहुत बड़ी है. आप इस पगडंडी को जिस ओर घुमाएंगे एक्सप्रेसवे उसी रास्ते गुजरेगा. आप समझ रहे हैं मैं क्या कह रहा हूं. बोलने के पहले एक बार और लिखने के पहले दो बार सोचना चाहिए.

कोई बात अन्यथा लगी हो तो क्षमा कर दीजिएगा.

जय सियाराम.

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