नाभि से अपने आप को कैसे उन्नत करें?

जो लोग साधना मार्ग पर आते हैं उन्हें सिखाया जाता है कि आप स्वांस को नाभि से लेना और छोड़ना प्रारंभ करें. अब बड़ी मुश्किल यह है कि चिकित्सा विज्ञान कहता है कि फेफड़े से सांस लो और छोड़ो. चिकित्सा विज्ञान ही नहीं आसन प्राणायाम में भी फेफड़ों से स्वांस को लेना और छोड़ना सिखाया जाता है. (कुछ प्राणायम छोड़कर). फिर साधना मार्ग पर स्वांस को नाभि पर केन्द्रित करने का क्या तुक है?

नाभि समस्त जीवन चक्र का आधार है. ध्यान रखिए मैं जीवन नहीं बल्कि जीवन चक्र की बात कर रहा हूं. इसलिए साधना मार्ग पर जो साधक आते हैं उन्हें कहा जाता है कि वे नाभि चक्र पर अपने स्वांस को केन्द्रित करें. इसका गहरा अर्थ यह होता है कि जब शिक्षक आपको नाभि पर स्वांस को केन्द्रित करने के लिए कहता है तो वह आपको आपके जीवन चक्र के साथ जोड़ने की कला सिखाता है.

अब सवाल है कि नाभि चक्र तक स्वांस को ले कैसे जाएं? जो जितना उद्विग्न, गुस्सैल और चंचल होता है उसकी स्वांस उतनी ही नाभि के ऊपर चलती है. लेकिन जो जितना सहज, बोधयुक्त और शांत होता है उसकी स्वांस उतनी ही नाभि के पास से चलती है. यह क्रिया अपने आप होती है आपको कुछ करना नहीं होता है. जब आप शांत होतें हैं तो आपको अनुभव होता है कि आपकी स्वांस नाभि केन्द्र के आस पास से चल रही है. रात में आप सोते हैं तो स्वांस अपने आप नाभि केन्द्र से चलने लगती है. ऐसा क्यों होता है?

ऐसा इसलिए होता है कि आपके शरीर पर आपके तर्क और भौतिक विचारों का प्रभाव कम हो जाता है. हमारे अस्तित्व/हमारे मूल और हमारे बीच में जो सबसे बड़ी बाधा है वह भौतिक विचार ही हैं. हम जितने बनावटी होते हैं अपने अस्तित्व से उतने ही कटे हुए होते हैं. इसलिए आप अपने सामान्य जीवन में नैसर्गिक रहने की कला विकसित करिए. ज्यादा बनावटी जीवन जीने से बचिए. थोड़ा बहुत जीना भी पड़े तो सोने से पहले उस बोझ को उतार दीजिए. क्योंकि अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो वह बनावटी जीवन धीरे धीरे आपको खोखला कर देगा.

इसलिए पहला काम तो यही कि बनावटी जीवन, बनावटी विचार, झूठे अहंकार इन सबसे तौबा करिए. इनका कोई मतलब नहीं है. आप को लगता है कि आप अपना स्तर उठा रहे हैं लेकिन हकीकत में आप अपने लिए ही संकट पैदा कर रहे हैं. इसलिए इनसे बचने की कोशिश करिए. इसका सीधा असर मन पर होगा जो आपके शरीर पर सकारात्मक रूप से दिखाई देने लगेगा.

दूसरा काम, जब कभी मन थोड़ा एकाग्र हो और आप आंख बंद करके कहीं बैठे हों तो अपनी नाभि पर अपने मन को ले जाइये. ऐसा करते हुए सिर से सब प्रकार के बोझ उतारते जाइये. यह दोनों क्रिया एकसाथ करिए. नाभि के करीब पहुंचते चले जाएंगे. विचारों के क्रम को हटाते जाइये और नाभि के आस पास मन को केन्द्रित करते जाइये. चार से छह महीने में अच्छी प्रगति होगी. धैर्य के साथ आगे बढ़ते जाइये.

तीसरा काम, थोड़ा और गहरी साधना में उतरे हुए लोगों के लिए जरूरी है कि श्वास को नाभि से सूक्ष्म होते हुए देखें. एक अवस्था ऐसी आयेगी कि स्वास गायब हो जाएगी. कोई स्पंदन नहीं होगा. नाभि पर भी कोई स्पंदन नहीं होगा. जब ऐसा होना शुरू हो तो प्रकाश को इड़ा-पिंगड़ा में संचरण करते हुए अनुभव कर सकेंगे. मूलाधार से सहस्रार तक शून्य का संचरण अनुभव होगा जिसके बाद ही ध्यान घटित होता है. जागृति होती है.

।।अलख निरंजन।।

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40 Responses

  1. अलख निरंजन

    आभार आपका!!

  2. मेरे लिए नयी जानकारी!

  3. आभार,
    अनुरोध है कि एक लेखमाला ऐसे प्रयोगों पर प्रारम्भ कीजिए जो गृहस्थ भी कर सकें और जिनमें गुरु की आवश्यकता न हो।

    • ये ऐसी विधियां हैं जिन्हें गृहस्थ और संन्यस्त दोनों ही प्रयोग कर सकते हैं. साधना का गृहस्थ और संन्यस्त से कुछ लेना देना नहीं है. ऋषि पहले गृहस्थ ही होते थे.

      इसलिए साधना पथ पर न कोई संन्यस्त है और कोई गृहस्थ.

      जो लोग गुरू की बात करते हैं उनसे मेरा यह कहना होता है कि पहले गुरू और शिक्षक का भेद समझिए. असल में सबको शिक्षक और प्रशिक्षक की तलाश है और कहते हैं कि गुरू नहीं मिल रहा. एक अच्छा शिक्षक खोजिए, और उससे कुछ विधियां सीखना शुरू करिए. वक्त आने पर गुरू अपने आप प्रकट होता है.

  4. nabhi se shwash lena hi sahi hai . osho ne aisa hi kaha

    • osho ne jo bhi kha us per aap visvas karte h ?

      • Ha me karya hu

  5. mere pita g ka do sall pehle swargwas ho gya tha jis karan mughe unki jagah par naukari mil gye magar mai abhi tak parmanet nahi hua, jisse abhi mere financial problem hai..mera man hamesha dukhi rehta hai kyunki mere pita g mere paas nahi hai agar wo hote to aisa na hota..mughe kisi se pyar ho gya magar mai khud he nahe samagh paya ke mai kya chahta ho aur wo bhe ladaki kya chahte hai kya isko pyar kaehte hai .ghar me bhe shanti nahe hai. mai kab parmanent hounga ,kab pyar mellega aur kab ghar me shanti hoge ye nahe pata mai kya karon. aap mera marg darshan kare aap ki badi daya hoge

    Artist

    • अब आपके सवाल का क्या जवाब दें? जिसके भी कंधे पर हाथ रखेंगे वह ऐसी ही किसी समस्या से ग्रस्त मिलेगा. ऐसी समस्याओं से उबरना हमें खुद होता है इसलिए उबारना भी खुद को ही पड़ता है. इसे समझेंगे तो बहुत कुछ समझ में आ जाएगा.

      आप अपना कल्याण खुद ही कर सकते हैं.

    • mujhe aap se hum dardi hai’ hme apna diya khud hi bnna hota hai….sbse pahle to aap jin chijo se dukh,sntap,our apni kmiyo se bhagna chah rhe hai .un sbhi ko smjhne ki koshish kijiye…aisa tb kre jb aap us dsha me us bhav me usi vkt ho…jaise jaise aap inhe smjhne lgenge aapki kmjoriya dur hoti jayengi…aap hr roj aapko jivan me jo dusre kisi dukhi insan se jyada mila hai uske liye aankhe bund kr thanks kahe..tb upr wala aapko fir dena shuru krega…jb rone ka mn kre to puri urja se roye …aap paise kmane ke liye vo kam krna aaj se hi shuru kr de jo vrtman me aap kr skte hai..rata apne aap khulta jayeg…rahi bat preemika ki to aap ye ishwar pe chhod de..aap aap khud jindgi me safal ho jayenge tb aapka asli pyar ishwar khud bakhud bhej dega…aap aaj se hi apna dhyan apne nabhi kenra me rkhna shuru kre..our hr pl ghri sanse lay badh sanse nabhi tk lijiye…jo aap nahi chahte use yad krna ya bolna bilkul chhod dijijiye our jo chahte hai uske liye ishwar ko dil me rkh kr mehnat shuru kjiye…ho ske to 10 minit hr din aankhen bund kr dhan kre..aapki jit hogi…

  6. bahut hee Shaandaar Dhang se AApne Dhan aur dhayan visha par lekh ke madyam se samjaane kaa pryaas keeya h. bahut he abhaaga hoga jo aapke samjaane kee parkirya par dhyaan n de. Aapne mere andar bhee ek nai urja jo kee positive urja kahi jaa sakti h kaa sahaj hee sanchaar kar deeya.
    ek baar phir parnam
    Yogesh Suri 30-10-2009 12:30 jalandhar

  7. इन सभी जानकारियों में कहीं कुछ अभाव सा प्रतीत होता है…

  8. aap yaha pyasa paida karne ko h ya pyas mitane ko ?

  9. रावण की नाभी विद्या
    यही विद्या तो रावण जानता था | तो फिर इस विद्या में रावण के ज्ञान का भी सहारा लेना चाहिए | रावण ने अपनी नाभी में अमृत खोजा था | और उसी अमृत के बल पर रावण ने अपने कटे हुए सिरों को फिर से उगाया था | गर्भनाल भी नाभी से ही जुडी रहती है | यह तो नाभी का विज्ञान है | यह विज्ञान बड़ा ही रहस्यात्मक है | गर्भ नाल से मानव के अंगों को दुबारा उगाने की | तो यही ज्ञान तो रावण भी जानता था | वह भी तो अपने अंग दुबारा उगा लेता था | तो फिर उसके ज्ञान पर विचार क्यूँ न किया जाए | और उसका ज्ञान भी तो गर्भनाल से सम्बंधित था | गर्भनाल जो है वह माता की नाभी और बच्चे की नाभी से जुडी रहती है | तो नाभी से भी तो इसका सम्बन्ध है | और अगर जब जानना ही है ज्ञान प्राप्त करना ही है तो ज्ञान तो किसी से भी लिया जा सकता है | जरूरी नहीं है की वह राम हो की रावण हो |

    यह विद्या इस तरह काम करती है जिस तरह एक ईंट के भट्टे पर ईंट पकती है | भट्टे के बीच में आग होती है और उसके वृति में ईंटें होती हैं | तो जिस तरह वह आग उन ईंटों को पका देती है उसी तरह से नाभी की विद्या में व्यक्ति की आत्मा और उसके शारीर के अंगो को पुष्टि प्रदान करती है | यह नाभि की क्रिया हमेशा चलती रहती है किन्तु हमको पता नहीं चलता है | की यह क्रिया कैसे चल रही है | अगर इस क्रिया को हम जान-समझकर करें तो यह क्रिया अपने आप में और अपने शारीर में परिवर्तन लाने में काफी कारगर सिद्ध होगी | यह विद्या एक और तरह से काम करती है जैसे तंदूर की आग, जैसे भाड़ की आग, जैसे ओवन की आग, इसी तरह यह विद्या शारीर में काम करती है |

  10. adinath sampradaya me yeh sabhi kriya ye hai aur kalyug ki suruat me navnath ne janam lekar is bat ko siddh kiya is sadhna se ve ajj bhi kal ko kahndan kar pure burumand me gumte he aur apne bhakto ko darshan dete hai

    alakh niranjan adesh

  11. lekh achha tha…..sadhuvad…….

  12. mera name babulal kuhwaha hai meri umra 26 varsh hai main daman se paresan hun mujhe july mah se septembar tak swans bahut paresan karti hai kripya koi upay batayen thankyou

  13. muje dhyan se bhagvan ko ek baar dejkana…he…me dhayn me har roj unhe dhundhne ki koshish karta hu

  14. bahuuuuuuuut achha…

  15. new knowleg in aadyatm

  16. धन्यवाद गुरुदेव.

  17. mai roj dhyan me baithta hu mujhe apne mastak ke kendr pe jaha tilak lagate hai vaha pr thoda sa dabav mahsos hone lagta hai ye dabav kyo hota hai pls
    reply

  18. sir mera name prem pathak hai me delhi se hu me b.com final year ka student hu sir mera mind bahut bhayak gya hai mj sanaj nhi aa rha me kya karu log kehte hai har insaan me ek achhi khubi hoti hai pr me us khubi ko nhi pehchhan paa rha mera mind bahut week ho gya hai me kaise dhyaan lagaau time ke sath 2 sir mera confidance leval bhi kam hota jaa rha hai please mj kya marna chaahiye mj battaye please sir reply jrur karna aap..

  19. sir mera name prem pathak hai me delhi se hu meri age 20 year he me b.com final year ka student hu sir mera mind bahut bhayak gya hai mj sanaj nhi aa rha me kya karu log kehte hai har insaan me ek achhi khubi hoti hai pr me us khubi ko nhi pehchhan paa rha mera mind bahut week ho gya hai me kaise dhyaan lagaau time ke sath 2 sir mera confidance leval bhi kam hota jaa rha hai please mj kya marna chaahiye mj battaye please sir reply jrur karna aap sir mujhe jaldi hi reply kare aap me apna contact number de rha hu..jaldi hi aap mujhe sujhaaw de. mo.-9968038568 , 9868797464.

  20. mai ne meri zindgi me sirf dukh hi dekha he to kya mai kabhi bhi shukh ko dekh paunga..?

  21. namaskar sir,
    meri age 25 h. mujhe pahle se hi durghtna ka pata chal jata h 6 ya 4 month pahle. 6-7 din hi hue h dhyan krte hue achanak teji se hilne lagti hu. Shari se bahut urjaa nikalne ka aabhas hota h jhatke b lagte h
    antariksh ki yatra krti hu. par apni chetna ko ni dekh pati. kb hoga aisa. or b bahut safe ànubhav h mere pass. pls I.d par btaiye.

  22. mene kbi pujapath ni kiya that ña kbi dhyan kiya tha. par mere mn me shanti in this jese kuch dhund rhi ho. jese kuch dekhna Chah rhi ho. bahut logo me mujhe dhyan krne ko kha PR mera mn in lgta tha. mere ghar me bahut musibate ai thi me bhagwan se hi kahti puchti k tu be mujhe yha Ku bheja or agar bheja h to Ku itni priksha leraha h. bs kbi kuch kahna hota to bhagwan k foto se bat krti khub roti un k pas kahti k agar tu bhagwan h or mere pas h ya me Teri sacchi bhakt hu to tu mujhe sahi rasta dikhayega. bs an mt le pariksha bahut hogya ab. or fir jese mere sath koi chamatkar sa hone LGA. bs men’s apna sarvasva bhagwan k charno me samarpit krdiya. av wahi h bs. mujhe kisi chin ka moh lobh in h. bs ab us she bat krna h bahut kuch puchna h

  23. chamatkar. bhagwan apne bhakt k bulane PR jarur aate h. aj mere prabhu ne sidhha kr diya. kal to dhyan krte samay mene prabhu se kaha. h prabhu mujhe Teri divya vani ki awaj sunna h tere divya darshan krna h. kya tere sachhe bhakt ki nahi sunega. me KB se tujhe pukar rahi hu puch rahi hu PR Teri to awaj b ni ati. mujhe sunn raha k nahi bhagwan. mujhe saral swarup me darshan Dede bhagwan. meri ankhen taras gai h tere divya swarup k darshan k liye. bs fir dhyan krte krte ek DM shunya ho gai. jhatke page. fir mene dhyan complete kiya or uth gai. nind ai so gai. dhyan ni8 me kiya tha. jhapki lgne PR prabhu aagye. PR alag rup me. unki dono ankhr white color me dikh rahi thi or poore black dikh rhe the. sapna ni hakikat this.be jhapki lgne wali thi PR mene ye anubhav kiya apne antarman me. or unho ne mere sir k dono or hath rakha or thoda DBA kr upr kiya n mera dimag sunn ho gya jese kahi mujhe legye ho. fir bahut sari awaje ane lagi tarah tarah ki or dimag bhari ho gya. aisa LGA k ab fatega mera dimag. fir dhire dhire halka hogya n nind lg gai. agle din bahut khush this mai.

  24. pahle wala dhyan kal gai ni8 me kiya tha es k baad jb agla dhyan kiya WO kal dopahar me kiya tha. jhatke lgne k bad nind ai n me so gai. jhapki lgne wli thi tabhi ek hawa ya shakti ki awaj sunai de rhi thi or mere dimag me sama rhi thi me uthna chah rhi thi PR uth ni oa rhi thi edhar udhr hone ki koshish b ki PR us shakti ne mujhe hilne tk ni diya. mene pucha ap kon ho. to divya vani Sunai d kaha me hu so ja. or jese mere dimag se sharir me samahit ho rhe the.. mene hare Krishna hare Krishna kaha. or fir dhire dhire ankhe kholi to koi ni tha. lekin WO sapna ni tha Ku k me soi ni thi.es k bad nind ane lgi me sogai. prabhu shwet vastra me aye the unho ne mera sir unki god me rakha tha or mere sir ko sahla rhe the aise pyar kr rhe the jese ek maa apne shishu ko krti h
    bahut achha lgame en palon ko kbi ni bhulugi. mera anubhav sirf me hi janti hu. ek bhakt hi meri baton ko smjhega. Ku k WO hi yaha tk pahuch sakte h. much log to ESE b h Jo pagal kahte h.

  25. sir, mujhe sapne me god ki divya vaani sunai deti h.. pls aap btaiye me dhyan k kis star tk pahuch paai hu… me koi b kaam krti hu to aisa lgta h k ye me nii hu. kaam pta ni KB khatm hojata h pta hii nii chaltaa…. pls btaiye sir. god ne sapne me mujhe merii shaktiya btaai pr mujhe jyada yaad nji h es bare me

  26. sir. aap mujhe btaiye k kese tiino Sharir ko dekha ja skta h… me sukchma, sthul, karan sharirr ko dekhna chahtii hu. KB hoskta h aisaa. mujhe aisa lgta h k ab me sbkuchh kr sktii hu. uuchhist sthiti me huu. . pls btaiye

    • Sarla ji .
      Agar aap aise hi apna parda logo ke samne hataate rahe to apko hone waale sb experience khtm hojayege.b
      BS ITNA KIJIEAE K KISI SE ISS BAARE ME KOI BAAT NA KRO.
      JISSE AAP POOCH RAHE HO WOH V AAP JAISA HI HAI .KOI AVTAAR NI .
      AGAR AP BHAGWAAN K NAZDEEK HAI TO APKO INSAAN KI KYA JRURAT HAI.
      CONTACT ME:9646589707.

  27. OK sir. bahut bahut dhanyawaad aapko.. par ek baat or.. k es prithwi PR agar bhagwan apne sachhe bhakt k bulaane par aasaktaa h… to WO bahut bhagyashaali ladkii hu mai.. or WO mere bulane PR aayaa h…koi experience khatm nii hotaa h..bhagwan kii jitnii jyada baat kroge utne kariib aaynge… fiir b me kisi ko nii btaati..

  28. Unbelievable,👍

  29. Reblogged this on Mahesh Badgujar.

  30. श्रीमान, एकाग्रता के वक़्त ये केसे पता चलेगा की हमारा मं नाभि चाक्र पर एकाग्र हो रहा है,
    कैसा आभास होता है???

  31. Kuch study dhyan mai nhi rahati.jaldi bhul jati hu

  32. मेरा मन एकाग्र नहीं होता, उपाय बताईये

  33. Bahut khoob

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