योगनिद्रा और तंत्र

योगनिद्रा तांत्रिक विधि है. तंत्र में शांति प्राप्त करने के जितने रास्ते बताये गये हैं उनमें योगनिद्रा बहुत ही सुगम और व्यावहारिक मार्ग है. योगनिद्रा का अभ्यास तीन चरणों में होता है. पहला चरण है शरीर का शिथलीकरण. दूसरा चरण है अनुभूति और तीसरा चरण है धारणा. अगर आप योग को समझते हैं तो ऐसे भी समझ सकते हैं कि पहला है आसन, दूसरा प्राणायाम और तीसरा चरण है धारणा. पहले चरण में आप भौतिक शरीर के स्तर पर मन को स्थापित करते हैं. दूसरे चरण में सूक्ष्म शरीर का अवलोकन करते हैं और तीसरे चरण में मन को अपनी इच्छा के मुताबिक निर्देशित करते हैं.

मन चंचल होता है. और यह चंचलता ही उसका स्वभाव और ताकत है. मन निश्चल हो सकता है लेकिन वह कभी स्थिर नहीं हो सकता. योगनिद्रा के पहले चरण में हम मन को बहुत प्राथमिक स्तर पर निर्देशित करते हैं. इसलिए हम शरीर के विभिन्न हिस्सों को बंद आखों से अवलोकन करते हैं. योगनिद्रा का प्रशिक्षक आपको निर्देश करता है कि दाहिने पैर का अंगूठा. तो आपका पूरा मन वहां उस दाहिने पैर के अंगूठे पर केन्द्रत हो जाता है. फिर इसी क्रम में वह आपके पूरे शरीर का मानस दर्शन कराता है. तंत्र में जिस अन्नमय कोश की बात की गयी है उस शरीर पर ही सबसे पहले मन को स्थापित करना जरूरी होता है. एक बार मन शरीर पर स्थित हो गया तो फिर वह आगे आपको सूक्ष्म अवस्थाओं में ले जाने के लिए तैयार होता है. 

इसके बाद दूसरी अवस्था होती है अनुभूति की. अनुभूति के स्तर को पाने के लिए आपके शरीर और स्वांस के साथ-साथ शरीर के अंदर में स्थित सूक्ष्म चक्रों की भी अनुभूति सिखाई जाती है. हमारे शरीर के अंदर में जो षट्चक्र हैं वे सब उर्जा के किसी न किसी स्वरूप को धारण किये हुए हैं. उन चक्रों का पदार्थ के साथ भी गहरा नाता होता है. मसलन आप मूलाधार चक्र की बात करें तो यह भू-पदार्थ का प्रतिनिधित्व करता है. इसी तरह स्वाधिस्ठान चक्र जल का प्रतिनिधित्व करता है. अब आपके मन में यह सवाल आना स्वाभाविक है कि अगर पदार्थ पांच हैं तो चक्र छह क्यों है? छठा चक्र पदार्थ नहीं परमानंद का प्रतीक है. जब पांच पदार्थ सम अवस्था में आ जाते हैं तो छठे चक्र का जागरण होता है जो कि परमानंद धारण किये हुए है. इसीलिए इसे अनाहत चक्र कहते हैं.

योगनिद्रा की तीसरी अवस्था धारणा की है. एक बार आप अपने शरीर को शिथिल करके चक्रों का भेदन करते हुए शांति की गहरी अवस्था में पहुंचते हैं तो आपका मन निश्चल अवस्था में होता है. यहां यह जरूरी है कि आप उस निश्चल अवस्था का उपयोग किसी श्रेष्ठ कर्म के लिए करें. योगनिद्रा करने के पूर्व संकल्प इसीलिए लिया जाता है कि जब आप मन की इस निश्चल अवस्था में पहुंचे आप किसी श्रेष्ठ कर्म की तरह अग्रसर हो. धारणा के वक्त आपको विभिन्न प्रकार की धारणा का अभ्यास कराया जाता है ताकि आप अनुभूति के स्तर पर वह सब अनुभव कर सकें जो यथार्थ के स्तर पर चारों ओर मौजूद है. एक बात समझ लीजिए जो कुछ भी भौतिक रूप में हमारे आस-पास मौजूद है वह सूक्ष्म रूप में भी उपलब्ध है. 

इन तीन अवस्थाओं के अभ्यास को ही योगनिद्रा का संपूर्ण अभ्यास कहते हैं जिसके सधने के बाद ध्यान में प्रवेश किया जा सकता है.

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13 Responses

  1. आभार जानकारी के लिए.

  2. oh, thank you for this secret knowledge, please go ahead.

    GOD bless you.

    harsh vardhan sharma

  3. i want to study yognidra kindly guide about where to study

  4. अगर आप योगनिद्रा के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो बिहार स्कूल आफ योग के स्वामी सत्यानंद सरस्वती द्वारा लिखी गयी पुस्तकों का अध्ययन करें. इसके अलावा पूना की किसी संस्था ने भी इस बारे में बहुत वैज्ञानिक काम किया है. उनके बारे में मुझे कुछ खास पता नहीं है लेकिन आप खोजेंगे तो पता चल जाएगा.

  5. want thayori yog nidra

  6. want yog nidra

  7. please specify time, after meal or before meal , what will happen if performed after meal stomach full of food?
    any side effect of yognidra ? please guide me…. because it ifnd me very useful in my

  8. swami ji sahaz yog se sadhna krta hun
    1 se 2 ghante harroz
    agar main dhayan na kendrit karu toh kya kuch hoga

  9. dekhne me atyant saral kintu karne me bahut hi kathin……..yahi karan hai ki har koi is path par agrsar nahi hota……….

  10. Call me8745995832

  11. अच्छा लगा आप का प्रयाश
    बहुत आभार

  12. mera pdhai main mahn bilkul nahi lagta kyaa muje eske liya kyaa hoga muje two minutes ka dhi yada nahi rahta hai suchhana Hindi main dena dhaiya or jaldh

  13. Mujhe tantra vidya sikhna hai

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