कृष्ण हर साल क्यों पैदा होते हैं?

कृष्ण हर साल पैदा होते हैं. उसी समय. उसी तिथि और वार को. क्या यह केवल उत्सवधर्म है या फिर इसके पीछे कोई और संदेश छिपा है?

कृष्ण ऐसे देवता हैं जो कालकोठरी में पैदा हुए थे. बहुत विपरीत परिस्थितियों में उनका जन्म हुआ था. पैदा हुए नहीं और मारने की योजनाएं पहले बनाकर रखी गयी थीं. और जब वे पैदा हुए तो सारी योजनाएं धरी रह गयीं. वे जिस कार्य के लिए आये थे जन्मते ही उसका शुभारंभ कर दिया. कृष्ण पैदा हो गये तो दूसरे की योजना नहीं चलेगी. अब तो कृष्ण की योजना चलेगी. हरिइच्छा का पालन करना होगा.

कृष्ण हर साल पैदा होते हैं और हमें संदेश देते हैं तुम विपरीत परिस्थितियों के बीच हो. दूसरों की इच्छाएं बलवती हैं. तुम्हें मुझसे कुछ सीख लेनी चाहिए. मैं भी विपरीत परिस्थितियों में पैदा हुआ था. काल कोठरी में. और बाहर निकलने की सोची मूसलाधार बारिश. उफनती नदी. चमकती बिजली और पग-पग पर मौत. फिर भी मैं लक्ष्य की ओर बढ़ा. कृष्ण यही संदेश देते हैं.

वे भगवान थे. चाहते तो परिस्थितियां अनुकूल कर लेते. ऐशो-आराम में पैदा होते. कंस क्या बिगाड़ लेता? लेकिन ऐशो-आराम की पैदाइश से बात नहीं बनती. श्रेष्ठ कर्म के लिए विपरीत परिस्थितियों का होना जरूरी है. राम जी आराम के माहौल में पले-बढ़े. लेकिन श्रेष्ठ कर्म करना था इसलिए 14 वर्ष का वनवास लिया. बुद्ध भी आराम में पैदा हुए थे लेकिन विपरीत परिस्थितियों का चुनाव उन्होंने खुद किया. न करते तो राम राम न होते, बुद्ध बुद्ध न होते और कृष्ण कृष्ण नहीं हो सकते.

आज भी संकट काल है. मानवता पर इतना भीषण संकट पहले शायद ही किसी युग में आया हो. आज नफे-नुकसान का हिसाब ज्यादा बढ़ गया है. इंसान भी वस्तु की माफिक हो गया है. अपनी चिंता करने की प्रवृत्ति चरम पर है. दूसरों की चिंता हमें होती नहीं. दूसरों के बारे में सोचना छोड़ दिया है. अपने बारे में सोचे जा रहे हैं और जरूरतें ऐसी कि पूरी ही नहीं होती. यह संकट काल है.

निज इच्छा को किसी भी तरीके से पूरा करना ही कंसत्व है. दूसरे के लिए जीना, दूसरों की चिंता करना कृष्णत्व है. ज्यादा दूर क्यों अपने आस-पास की ही चिंता करें. किसी गरीब को कुछ मदद कर दें. किसी जरूरतमंद की थोड़ी मदद कर दें. हमारे आस-पास जरूरतमंदों की फौज खड़ी है और हमें अपनी चिंता से फुरसत नहीं है. अपनी जरूरत पूरी करने के साथ-साथ थोड़ी दूसरों की जरूरत की भी पूर्ति कर दें. यही आज के युग का कृष्णत्व है.

जय श्री कृष्ण

।। अलख निरंजन ।। 

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11 Responses

  1. जो महान लोग होते हैं उन्हें हर साल पैदा होना ही चाहिए .

  2. Jai Shree Krishna. Bhagawan Shree Krishna ka charitra ham sabhi ko yahi shiksha deta hai, jaisa ki aapane lekh mein kaha hai. Vipareet paristhitiyon ko kis prakar se mod kar anukool banana chahiye, aisa sandesh is leha se prapta hota hai. Yahi sandesh Shri Krishna Bhagawan ka hai. Ham yah sab na bhool jayen, is karan se Krishna janma ashatami manate hai, jo paroksha ya aparoksha roop se Shri Krishna ki hidayaton ki yaad dilate hain. Yah kahana galat hai ki sab jagah kans paida ho rahe hain, lekin aise kanso ka jeevan bahut thoda hota hai.

  3. कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं। प्रेमपुरूष कृष्ण का संदेश आपके जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाए।

  4. जो हमे अच्छा लगे.
    वो सबको पता चले.
    ऎसा छोटासा प्रयास है.
    हमारे इस प्रयास में.
    आप भी शामिल हो जाइयॆ.
    एक बार ब्लोग अड्डयावर में आके देखिय

  5. dear rawat ji

    reg….

    sks

  6. Krishna Bhagwan The ya nahin, mahatva hai krishnatva ka. AAp ne bahut thik likha hai. ham apne aas-pas dekhana siekhen aur unke prati mangalbhav se pes aayen to apna bhi bhala hoga aur unka bhi.

    dhanyawad.
    yadav

  7. KRISHNA BHAGWAN HAR SAAL JANAM LAKE HUME APNE DHARM KI YAAD DILAATE HAI

  8. kabhi krishna niti par kuch behtarin likhe.

  9. shyam hi aakri stay hai prem mai pane ki nahi dene ki icha rkho sda man ko santi milegi ……

  10. krishn bhagvan hume bus yahi sandesh dete hai ki chahe kitni badi problem bhi kyo na ho hume uska samna dherye aur vivek ke sath karna chaiye.

  11. alsye ko durkarne ka safal upaye batayen

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