दो मिनट का ध्यान

रीढ़ को सीधा करके बैठ जाईये. आंखे बंद.

पूरे शरीर को ढीला छोड़ दीजिए. ध्यान रहे कमर झुकनी नहीं चाहिए.

बंद आंखों से अपना पूरा ध्यान मूलाधार क्षेत्र में ले आईये. (मूलाधार क्षेत्र यानि लिंग और गुदाद्वार के मध्य में)

पूरा ध्यान बंद आंखों से वहीं एक जगह पर केन्द्रित करिए. गुदा द्वार को ढीला छोड़ दीजिए. लिंगमूल को ढीला छोड़ दीजिए. इससे सांस की गति अचनाक गहरी और तीव्र हो जाएगी. अपने स्वांस पर ध्यान दीजिए. अब अपना पूरा ध्यान नासिका छिद्रो पर ले आईये. स्वांस के आने-जाने की प्रक्रिया को देखिये. मूलाधार से नासिकाग्र तर स्वांस की गति को देखते रहिए. कम से कम 32 स्वांस प्रश्वास तक आप इसी अवस्था में रहें.   

इसके बाद जब मन करे बाहर  आ जाईये. धीरे से आंखे खोल लीजिए. अब देखिये तो ध्यान में जाने से पहले और अब में कितना फर्क पड़ा है. कुल समय लगा मात्र दो मिनट.

इस प्रक्रिया को दिन में जितनी बार चाहें दोहरा सकते हैं. कान्स्टीपेशन, तनाव, हाई ब्लडप्रेशर में बहुत लाभ होगा.

।। हरि ऊँ तत् सत् ।। 

अलख निरंजन

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17 Responses

  1. आभार प्रक्रिया बताने हेतु.

  2. manish madhukrrao deshpande
    shastrinagar, bhavsarchowk, taroada nakar
    nanded.
    mobile no. 09890995047

  3. shastrinagar, bhavsar chowk, taroda nakar, nanded.
    my mobile no. 9890995047

  4. meri samasya hai ki mai reading me concerntrate nahi kar pata hoo. class me bhi dhyan nahi lag pata hai dimag edhar udhar chala jata hai. eske liye yog btaye jis se mai dhyan laga sakoo. dhanyawad

    • Aapki problem bahut hi normal hai aap subah 30 min. pranayam kare aur fir aram se let jaye aur puri body ko relax chod de aur jo bhi vichar aye unhe sqahaj ane de aur unhe SWIKAR kare aur fir nai takat se pure junun se apna karm kare.mere dost safalta aapke kadmo ko chumegi….

  5. jai shri krishana thx

  6. mari samasya hai kai mara mai puri sahan sakati nahai rakh pata or mara ander confidant kai bhai kami aa jati hai plz right solution

    • जब तक आपको पता है कि आपके अंदर सहनशक्ति नहीं है तब तक आपके अंदर सहनशक्ति कभी नहीं आयेगी. आपके अंदर सहनशक्ति है या नहीं इसे सोचने की बजाय सहज रहना सीखिए. गुस्सा आता है तो इसमें बुरा क्या है? क्षण भर का गुस्सा जीवन भर के संस्कार का हिस्सा होता है. जीवन का संस्कार बदलिए क्षण भर का गुस्सा नहीं आयेगा. हर समय क्षणभर के गुस्से को दबाने में वह और उबलेगा. जब गुस्सा आये तब खूब गुस्सा करिए लेकिन साथ में ध्यान भी रखिए कि आप गुस्सा हो रहे हैं. गुस्से को साक्षी भाव से देखते जाइये और खूब गुस्सा होइये.

      फिर अगली बार भी ऐसा ही करिए. खूब उतावलपान दिखाइये लेकिन साथ में यह देखते भी रहिए कि आप उतावले हो रहे हैं. थोड़ा समय लगेगा और जीवन का संस्कार बदलने लगेगा. फिर उस संस्कार का प्रभाव जीवन के नित्य प्रति के कार्यों भी दिखेगा.

      क्रोध, अधैर्य यह समस्या नहीं हैं, समस्या का लक्षण हैं.

  7. Mera man har samya chanchal rahata hai. dhayan karte samya bhi ekagra nahi ho pata hai.kya karnu?

  8. dhyan se kya hum apne apko badal sakte hai

  9. mera naam amit hai mujhe gusa bhot aata hai per me ander hi rakhta hu bas darta hu gusa karuga to kharab na lage kya me sai hu ya nai aur dhyan kese karu kay time per jise me shant ho jahu aur chid-chid bi na karu

  10. bahut bahut dhanyawad……….

  11. mujhe apne bete ki rashi janni hai kya aap mujhe bataenbge

  12. Mene suna hai k human body me saat chakra yaani kundalini shakti shushupt avastha me hoti hy kya aap muje bata sakte hy k un kundalini shaktiyo ko kese jagrit kar saktw hy un chakro ko jagrit karne k asan or bij mantra k bare me kuch bata sakte hy or kundalini shaktiya.jagrit ho gayi hy uska pata kese chalega plzz mere liye ye janna bahut jaruri hy plzz margdarshan deplzzz

  13. Mai plicha janam ma ka tha

    • Mai pechlea janam ma katha

      • बीती बात विसार दे आगे की सुध ले

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