अमीर-गरीब और दरिद्र

गरीब और गरीबी दोनों का महिमामंडन नहीं करना चाहिए. लेकिन इतना तो तय करना पड़ेगा कि गरीब कौन है और गरीबी क्या है. आज हम लोग जिन्हे गरीब कह रहे हैं वे गरीब नहीं हैं, वे हमारी परिभाषा में गरीब हैं. अगर मेरे पास टीवी है और किसी के पास नहीं है तो वह मेरी परिभाषा में गरीब है. लेकिन टीवी को अमीरी की परिभाषा बनाई किसने? आज हमारे आस-पास जो गरीब दिख रहे हैं वे हमारी परिभाषा के गरीब हैं.

गरीबी और दरिद्रता है और दोनों ओर हैं. वे भी गरीब हैं जो रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं और वे भी गरीब हैं जिनके पास जरूरत से ज्यादा रोटी इकट्ठा हो गयी है. इकट्ठा करते गये और कभी सोचा ही नहीं कि इसका करेंगे क्या? जो भी वस्तु हम जरूरत से ज्यादा इकट्ठा कर लेते हैं तो वह विकार बन जाती है. शरीर में जरूरत से ज्यादा चर्बी इकट्ठा कर ली तो वह रोग बन जाता है. इसी तरह जरूरत से ज्यादा धन इकट्ठा करना भी विकार बन जाता है. लोग आपके इस इकट्ठा धन से आपकी तुलना करते हैं तो आपको अच्छा लगता है. लेकिन अपने इस धन से आप कोई संवाद नहीं कर सकते. आप जानते हैं कि मैं यह धन नहीं हूं और आपको आपके रूप में लोग जाने यह इच्छा आपके मन में रहती है.

धनवान के मन में भी अभाव है. निर्धन तो अभाव में है ही. अमीरी की हमारी परिभाषा बहुत गजब की है. वस्तुओं के इकट्ठा करने को हम अमीरी कहते हैं. जिसके पास वस्तुओं का अजायबघर नहीं है उसको गरीब करार दे देते हैं. जीवन की पांच मूलभूत आवश्यकताएं हैं-

1. रोटी

2. कपड़ा

3. आवास

4. सच्चे मित्र

5. सम्यक विचार

ये पांच मूलभूत आवश्यकताएं हैं जो हर मनुष्य के लिए जरूरी हैं. जिनके पास ये पांच निधियां हैं वह परम सुखी है. जिनके पास इनमें से एक का भी अभाव है वह दरिद्र है.

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