Archive for the 'सेवा से मुक्ति' Category

यहां अकेला कोई नहीं होता
June 12, 2007

ऊँ शांतिः शांतिः शांतिः 
मेरे लिखे को कुछ लोग पढ़ते हैं और उसमें से कुछ लोग ऐसे हैं जो अपनी मंशा से मुझे अवगत भी कराते हैं. इंटरनेट की दुनिया में भाषाई अल्पसंख्यकों का यह बर्ताव प्रेरक है. मैं खुद भी नियमित कुछ चिट्ठीयों को पढ़ता हूं और कुछ पर अपनी मंशा से उन्हें अवगत कराता हूं. [...]