Archive for the ‘शांतिपाठ’ Category

मा कश्चिद् दुःख भागभवेत्
June 1, 2007

कौन दुखी नहीं है? दुख के प्रकार बदल जाते हैं लेकिन हर व्यक्ति दुखी है. मजे की बात तो यह है कि कोई दुखी होना नहीं चाहता फिर भी दुखी रहता है. आज का समय छद्म सुखवाला है. हर कोई दुखी है लेकिन सुखी दिखने का अभिनय करता है. एक बात आप जान लीजिए दुख [...]