रूक जाओ

बस रूक जाओ. अभी. यहीं. इसी वक्त. एक क्षण आगे नहीं. एक क्षण पीछे नहीं. इसी घड़ी में इसी क्षण में रूक जाओ. अपने शरीर को स्थिर कर दो. जड़वत. शरीर का कोई हिस्सा हिलना नहीं चाहिए. तनिक भी नहीं. हाथ जहां हैं रहने दो. पैर जहां हैं वहीं रोक दो. आंखें खुली हैं तो खुली ही रखना. पुतलियों को रोक दो. शरीर जिस हालत में है रहने दो. यह मत देखना कि यह टेढ़ा है तो थोड़ा सीधा कर दें. यह मत देखना कि थोड़ी रीढ़ की हड्डी सीधी कर लें. टेढ़े-मेढ़े आड़े-तिरछे जैसे हो वैसे ही स्थिर हो जाओ. थोड़ी देर उसी अवस्था में मन को अपने शरीर के साथ मिलाने की कोशिश करो. मन को अनुभव करो. सांस को अनुभव करो.

तुम्हें अपूर्व शांति का अनुभव होगा. तुम्हारा मन स्थिर हो जाएगा. सांस लयबद्ध हो जाएगी. शरीर और मन में नयी ताजगी भर जाएगी. क्या अनुभव होगा यह तुम जानों लेकिन जो अनुभव होगा वह तुम्हारे जीवन में बहुत काम आयेगा.  

ज्यादा नहीं. तीन-चार मिनट. ऐसे ही दिन में कई बार स्थिर होने का अभ्यास करो. जब याद आ जाए तो कर लेना. कोई नियम मत बनाना कि इतने बजे करना है. ऐसे करना है. बस जब याद आ जाए कर लेना. यात्रा करते हुए याद आ जाए तो कर लेना. बैठे-बैठे याद आ जाए तो कर लेना. चलते-चलते याद आ जाए तो कर लेना. कहीं किनारे खड़े हो जाना किसी अजनबी की भांति और बस वहीं थोड़ी देर के लिए स्थिर हो जाना. देखना दुनिया कैसे चल रही है और तुम कैसे स्थिर हो गये हो. धीरे-धीरे संसार का बहुत सारा रहस्य समझ में आने लगेगा.  अपने संकट और उनके समाधान भी समझ में आने लगेंगे.

तुम इसका अभ्यास करना. धीरे-धीरे ध्यान की ओर बढ़ने लगोगे. मन को पकड़ना शुरू कर दोगे. क्योंकि अब मन समझ में आने लगेगा. उसकी गति समझ में आने लगेगी. और एक बार इसकी गति समझ में आने लगे तो सुख-दुख का भेद अपनेआप मिटने लगता है. बहुत कुछ होने लगता है. बहुत कुछ…..

 ।।अलख निरंजन।।

2 Responses

  1. बढिया लिखा है।

  2. AAPKA YAH VICHAR ATYADHIK UCHCH KOTI K HAI. MAIN AAP K V 4 O SE PARBHAVIT HU.

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