जय शंखगदाधर नीलकलेवर, पीतपटाम्बर देहिपदम्
जय चंदनचर्चित कुण्डलमंडित, कौस्तुभशोभित देहि पदम् ।।1।।
जय पंकज लोचन मारविमोहन पापविखण्डन देहि पदम्
जय वेणुनिनादक रासविहारक बंकिम सुंदर देहि पदम् ।।2।।
जय धीर धुरंधर अद्भुद सुंदर दैवतसेवित देहिपदम्
जय विश्वविमोहन मानसमोहन संसृतिकारण देहि पदम् ।।3।।
जय भक्त जनाश्रय नित्य सुधालय अंतिम बान्धव देहि पदम्
जय दुर्जयशासन केलिपरायण कालियमर्दन देहि पदम् ।।4।।
जय नित्य निरामय दीन दयामय चिन्मय [...]