कौन दुखी नहीं है? दुख के प्रकार बदल जाते हैं लेकिन हर व्यक्ति दुखी है. मजे की बात तो यह है कि कोई दुखी होना नहीं चाहता फिर भी दुखी रहता है. आज का समय छद्म सुखवाला है. हर कोई दुखी है लेकिन सुखी दिखने का अभिनय करता है. एक बात आप जान लीजिए दुख का होना कोई बुरी बात नहीं है. जैसे छांव का महत्व जानने के लिए धूप में रहना बहुत जरूरी है उसी तरह आपके अपने जीवन के लिए दुख का होना बहुत जरूरी है.
दुख न हो तो व्यक्ति का विकास न हो. आपके सारे सद्गुणों की परख दुख और संकट के समय में ही होती है. महान लोगों का जीवन देख लीजिए, सब दुख में पैदा हुए, उसी में पले-बढ़े और उसी में मर गये. जो सुख के माहौल में पैदा हुए उन्होंने दुख को आमंत्रित कर लिया. बुद्ध दुख न उठाते तो कभी बुद्ध न बनते. रामजी दुख न उठाते तो कभी पूज्य न होते. अर्जुन विषाद में न पड़ते तो गीता हमलोगों को कभी न मिलती. बोलिए, मिलती क्या?
अपने दुख से दुखी मत होना. दूसरों के दुख से दुखी होना और उसे दूर करने का प्रयास करना. दूसरे का दुख दूर करना. कोई दुखी न मिले तो खोज लेना. कोई मदद न मांगे तो अपने से प्रस्ताव कर मदद कर देना. इसका आपके मन पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ेगा. आपको सच्चे सुख का अनुभव करना है तो यह काम करना पड़ेगा. अपने अंदर दान, सेवा की प्रवृत्ति पैदा करनी पड़ेगी. सच्चे सुख का रास्ता यहीं से खुलता है.
अपने आश्रितों के लिए तो सभी काम करते हैं. वह तो आपका काम है. कभी पल दो पल के लिए दूसरे को आश्रय देकर देखना. अपनी ही नजर में आपका कद ऊंचा हो जाएगा. स्वस्थ और सुखी रहने के हम न जाने क्या-क्या उपाय करते रहते हैं. मैं देखता हूं लोग हजारों-लाखों रूपया खर्च कर अपने लिए न जाने क्या-क्या करते रहते हैं. फिर लोगों में उसकी चर्चा करते फिरते हैं. यह सब फिजूल और बकवास है. सच्चा सुख दूसरों की मदद में छिपा है.
मैंने जो शांतिपाठ का सुझाव दिया है, उसका नियमित स्मरण करिए. अगर यह मंत्र आपको आत्मसात हो गया तो तय मानिये आपके जीवन में ऐसे आनंद का पदार्पण होगा जिससे अभी आप बिल्कुल अछूते हैं. जो हृदय से दूसरों के सुख की प्रार्थना करता है वह कभी दुखी नहीं होता.
हरि ऊँ तत् सत्
बिल्कुल सही लिखा है बन्धु। सेवा परमो धर्म।
पश्चिमी अर्थ शस्त्र सिखाता है कि सिर्फ़ अपनी तरक्की पर ध्यान दो, समाज की भी परोक्ष रूप से तरक्की होगी।
प्राचीन भारतीय सन्त लोग कह गये हैं की “दूसरों के दुखडे़ दूर करने वाले, तेरे दुख दूर करेंगे राम”.
ये अपुन की चॉइस का मामला है।
पूर्णत सत्य वचन
दु:ख ही शाश्वत और वैश्विक है ।
‘सबसे मधुर हैं गीत वही जो दर्द के सुर में गाते हैं’
नानक दुखिया सब संसार ।
दु:ख ही शाश्वत और वैश्विक है ।
सबसे मधुर है गीत वही जो दर्द के सुर में गाते हैं ।
नानक दुखिया सब संसार ।