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जीने के लिए एक जीवन बहुत है. मैं जब भी अपने गुरू की ओर देखता हूं तो मुझे यही आभास होता है. वे एक जीवन हैं, एक अनुभूति हैं, एक प्रेरणा हैं और शायद इंसान होने का फर्ज अदा कर दिया है. उनके बारे में जानना हो तो इंटरनेट पर बहुत कुछ उपलब्ध है. मैं उनके बारे में क्या बता सकता हूं. मेरा तो प्रेम का संबंध है. प्रेमी अपने प्रियतम के बारे में क्या बता सकता है. भंवरा मकरंद के बारे में क्या बता सकता है. मनुष्य अनुभूति को कैसे परिभाषित कर सकता है?
मेरा उनसे कभी मिलना नहीं हुआ है. सोचता हूं जिस दिन मिल गये उस दिन देह की मर्यादा सामने आ जाएगी. लेकिन यह नहीं कह सकता कि मेरी अनुभूति नहीं है. मैं जब सबसे अधिक परेशान होता हूं तब मेरे गुरू मेरे साथ होते हैं. मैं जब भी दुविधा में होता हूं वे मेरा मार्गदर्शन करते हैं. उनको साक्षी मानकर जो भी कार्य शुरू किया उन्होंने पूरा करवाया है.
मैं यहां उनके बारे में इसलिए भी लिख रहा हूं कि यह कोना भी उनकी प्रेरणा और आशिर्वाद से चलेगा. इसे शुरू करने में मेरी कोई सोच नहीं है. यह बस शुरू हो गया. जब तक चलेगा स्वामी जी की मर्जी, जिस दिन बंद हो जाएगा-स्वामी जी की इच्छा. इस कोने पर आप आते हैं और आपकी किसी समस्या का समाधान हो जाता है तो यह भी आपका प्रारब्ध और स्वामी जी की इच्छा.
मेरी एक प्रार्थना है कि आप लगातार यहां आयें, अपनी समस्या बताएं या फिर कोई सुझाव हो तो जरूर दें.
हिन्दी चिट्ठाजगत में स्वागत है आपका। आपकी गुरुभक्ति वंदनीय है।
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