न मेरा कोई नाम है, न पता, न ठिकाना. परेशान होने की जरूरत नहीं है. नामों से भेद करने की मानसिकता ठीक नहीं है. पहचान की सुविधा के लोभ में कब हमने नामों को आधार बनाकर भेद विकसित कर लिए क्या हमें पता चला?
नाम हटा दिया जाए तो वहां जो बचता है वह कौन होता है?
जाति भेद समाप्त कर दिया जाए तो वहां जो बचता है वह कौन होता है?
धर्म का परिचय हटा दिया जाए तो वहां जो बचता है वह कौन है?
शरीर की मर्यादा हटा दी जाए तो वहां जो बचता है वह कौन है?
वह जो शेष रह जाता है वही है हम भी और आप भी.
आप की जय हो बन्धुवर.. आप के इस ब्रह्म-स्वरूप को नमन करता हूँ.. आप इसी राह पर निरन्तर अग्रसर रहें, ऐसी मंगलकामना करता हूँ..
yahee to janna hay ki main kaun hoon. ek bar swami dayanand sarswati ney darwaza khatkhataya, to andar sey pucha gaya ki kaun, to dayanand ney jawab diya ki yahee too janna hay kee main kaun hoon.
yahee too samajhney kee jarurat hay kee main kaun hoon. kewal yahee pahelyee hain.
please acknowledge. with thanks, yours Dr. H V SHARMA.